देहरादून। उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव का प्रस्ताव रखा है। विधानसभा सत्र के पहले दिन सरकार ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक सदन में पेश किया। इसके तहत धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को लागू करने से पहले उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से अनुमोदन लेने की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव है।
संशोधन विधेयक में अधिनियम की धारा 12 की उपधारा (3) से ‘उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के अनुमोदन से’ शब्द हटाने का प्रावधान किया गया है। इस बदलाव के बाद राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में संशोधन करने और उसे लागू करने के लिए परिषद की पूर्व मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में लागू किए गए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में यह व्यवस्था की गई थी कि राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के अनुमोदन के बाद ही संशोधित और लागू कर सकेगा।
प्रस्तावित संशोधन के जरिए सरकार इसी व्यवस्था में बदलाव करना चाहती है। हालांकि, विधेयक पेश किए जाने और उसके कानून बनने की स्थिति अलग-अलग है। इसकी अंतिम स्थिति सदन में विधायी प्रक्रिया पूरी होने पर स्पष्ट होगी।
