धराली। उत्तरकाशी जिले के आपदा प्रभावित धराली गांव में विनाशकारी आपदा के एक वर्ष दो माह बाद ग्रामीणों ने मलबे में दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर को खोजने और उसके जीर्णोद्धार की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं। रविवार को नवरात्र के पहले दिन शुभ अवसर पर ग्रामीणों ने आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के आदेश और सानिध्य में मंदिर की खोज के लिए खुदाई शुरू की।
मंदिर समिति से जुड़े लोगों के अनुसार, इतिहास में यह चौथी बार है, जब कल्प केदार मंदिर को खोजने का काम शुरू किया गया है। इससे पहले वर्ष 1926 में खुदाई के दौरान कल्प केदार के मुख्य मंदिर को जमीन के नीचे खोजा गया था। अब एक बार फिर आपदा के मलबे में दबे इस प्राचीन मंदिर को सामने लाने की उम्मीद के साथ ग्रामीण जुट गए हैं।
ग्रामीणों के लिए कल्प केदार मंदिर केवल एक प्राचीन धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि उनकी आस्था और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। आपदा के बाद मंदिर को खोजने और उसके जीर्णोद्धार की पहल को इसी विरासत को संरक्षित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
नवरात्र के पहले दिन शुरू हुई इस खोज के दौरान ग्रामीणों ने समेश्वर देवता की देवडोली के सानिध्य में मंदिर की खुदाई का कार्य आरंभ किया। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मलबे के नीचे दबे प्राचीन मंदिर के अवशेष कब सामने आते हैं।
