बिहारीगढ़। कभी दिल्ली-देहरादून मार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए बिहारीगढ़ का पकौड़ी बाजार एक खास पड़ाव हुआ करता था। यहां की गर्मागर्म पकौड़ियों और चाय का स्वाद इतना मशहूर था कि दूर-दराज से गुजरने वाले यात्री कुछ देर रुककर इसका जायका लेना नहीं भूलते थे। बाजार की करीब 48 दुकानों से सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई थी।
समय बदला, सड़कें बेहतर हुईं और सफर पहले से तेज व सुगम हो गया, लेकिन विकास की यही रफ्तार पुराने बाजार के लिए परेशानी का कारण बन गई। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद बिहारीगढ़ में बना पुल बाजार के ऊपर से गुजर रहा है। अब दिल्ली और देहरादून की ओर जाने वाले अधिकांश वाहन एक्सप्रेसवे से सीधे निकल जाते हैं।
पहले जहां वाहनों की आवाजाही के कारण यात्रियों का बाजार में रुकना आम बात थी, वहीं अब एक्सप्रेसवे ने इस ठहराव को काफी कम कर दिया है। इसका सीधा असर पकौड़ी बाजार के कारोबार पर पड़ा है। दुकानदारों के मुताबिक, यात्रियों की संख्या घटने से बिक्री में भी कमी आई है और कभी गुलजार रहने वाला बाजार धीरे-धीरे अपनी पुरानी पहचान खोता जा रहा है।
कभी हर सफर का हिस्सा था पकौड़ी बाजार
बिहारीगढ़ का पकौड़ी बाजार सिर्फ दुकानों का समूह नहीं, बल्कि इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों की यादों का हिस्सा रहा है। गर्म तेल में छनती पकौड़ियों की खुशबू, साथ में चाय और सड़क किनारे कुछ देर का ठहराव—यहां का यही अंदाज यात्रियों को आकर्षित करता था।
48 दुकानों के सामने रोजी-रोटी का सवाल
बाजार में करीब 48 दुकानें हैं और इनसे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में परिवार जुड़े हैं। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यात्रियों के बाजार में रुकने की संख्या कम होने से दुकानदारों की चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि यदि बाजार को फिर से यात्रियों से जोड़ने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले समय में कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
विकास की रफ्तार ने सफर तो आसान कर दिया, लेकिन बिहारीगढ़ के इस पुराने पड़ाव के सामने अपनी पहचान और कारोबार बचाए रखने की चुनौती खड़ी कर दी है।
